Monday, 29 July 2013

प्रिय पाँच रुपये,

खाते पीते कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने आज पाँच रुपये का जो सम्मान किया है उससे मैं बहुत ख़ुश हूँ । पाँच रुपये को कोई कुछ समझ ही नहीं रहा था । जब से सिक्का चरन्नी हो गया है सारा भार पाँच रुपया पर आ गया था । बारातों में पाँच रुपये की गड्डी उड़ते देखी है । बैंड मास्टर को नवाज़ कर हवा में उछालते हुए । पनटकिया का क्या जलवा होता था । पांच का नोट मिला नहीं कि मिठाई की दुकान पर । देहातों में तीन पत्ती में पांच रुपये को पांचाली की तरह दांव पर लगते देखा है । रेड लाइट पर देखा है लोग अब कार के डैश बोर्ड से पाँच का सिक्का ही देते हैं । जिसे देखो वही पाँच रुपया दान दिये जा रहा है । इतने कम में दानवीर बनने का सुख प्राप्त किये जा रहे हैं सब । यही वो पाँच रुपया है जिसे मोदी के लिए प्रति श्रोता वसूला जा रहा था । जो लाख से मिलकर पाँच लाख होकर उत्तराखंड में रौनक़ बहाल करने वाला है । पाँच रूपये के कितने ही चिप्स के पैकेट सड़कों पर मिल जायेंगे । जिन्हें खाकर ग़रीबों के ललना पेट जलाते हैं । अमीरों के बच्चे ज़िद में पाकर ख़ुश हो जाते हैं । पाँच रूपये में कुछ मिलता तो लोग ऐसे बाँटते न चलते । सबकुछ शांति से चल रहा था । रशीद मसूद साहब ने पाँच रुपये की औकात लगा दी । एक टाइम का खाना मिलता है पाँच रुपये में । पाँच रुपये का ऐसा टाइम आ गया सुनकर चकरा गया । रशीद साहब भी खाते हैं । बीमारी की वजह से । हवा और पानी फ़्री का हो तो शायद बाक़ी दाल पानी आ जाता होगा । पता ऐसा बताया जैसे लंदन का हो । जामा मस्जिद के लोग भी भटक रहे हैं । पाँच का खाना खाने के लिए । फटे पुराने नोट बदले जाने की दुकानों के आगे लाइन लगी है । पाँच नया कर रहे हैं । जिसे देख वही पाँच का सिक्का उछाल रहा है । फ़िज़ा में पाँच ही पाँच है । रिक्शा भी पाँच है ठेला भी पाँच है । खुशी के मारे सब पागल हो रहे हैं । खाना खोज रहे हैं । पाँच रुपये को देखकर ही पेट भर रहे हैं । कोई अपना पाँच रुपया किसी को दान में नहीं दे रहा है । दो टकिया की नौकरी में तेरा लाखों का सावन जाए टाइप माहौल है । झंडू पंचारिष्ठ टाइप शक्तिशाली फ़ील कर रहे हैं । आज पाँच का पंचनामा टीवी पर आयेगा । रशीद आयेंगे,नकवी आयेंगे । एक ग़रीब के पेट पर लात मारेंगे एक सहला़येंगे । रशीद साहब की कल किताब आयेगी । पाँच रुपये में कामयाब भोजन कैसे करें । नकवी साहब की किताब आएगी कि पाँच रुपये में कैसे रशीद साहब को खिला आएं । कुतर्कों का कुचक्र चलेगा । फिर खंडन आयेगा । फिर नया बयान आएगा । बीजेपी आरोप लगाएगी सरकार ने पैमाना घटाकर ग़रीबी घटा दी है । अपनी राज्य सरकारों में घटी ग़रीबी के पैमाने नहीं बताएगी । अगर पैमाना बढ़ जाए तो देश में ग़रीबी भी बढ़ जाए । उनके राज्यों में भी बढ़ जाएगी । फिर सबके ग्रोथ की पोल खुलेगी । आंकड़ों के हेरफेर के खेल का भांडा फूट जाएगा । भारत की ग़रीबी पाँच रुपये में इतरायेगी । रशीद साहब वित्त मंत्री बन जायेंगे और चिदंबरम उनके खजांची । टीवी पर ग़रीबी की हर थाली का सैंपल सजा मिलेगा । पाँच रुपये को भारत का राष्ट्रीय रुपया घोषित कर दिया जाएगा । पाँच रुपये के सम्मान में एक दिन मसूद दिवस मनाया जाएगा । लोगों को बुला बुलाकर पंतुआ वग़ैरह खिलाया जाएगा । छुट्टी घोषित होगी । लोग उस दिन सिर्फ पाँच रुपये का ही खाना खा़येंगे । जो जो खा लेगा रईस घोषित कर दिया जाएगा । राजनीति में मूर्ख होते हैं । मूर्ख रहेंगे । पनटकिया काल है कांग्रेस का ये । कपार पीटते रहिए । इसलिए हे पाँच रुपये तुम दुखी मत होना । शान से कहो मैं पाँच हूँ पाँच । अब कोई तुम्हें नहीं फेंकेगा । बस ज़रा देखना बारह रुपया बाज़ी न मार ले जाए । सरकार बारह का बब्बर नोट न छाप दे । बब्बर करेंसी ।

                                                                                                                              तुम्हारा      पत्रकार

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